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घोषणाओं से क्रियान्वयन तक: मोदी–भजनलाल युग में राजस्थान
डॉ .नयन प्रकाश गांधी ,मैनेजमेंट विश्लेषक ,पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट ,एलुमनाई अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान मुंबईराजस्थान की राजनीति में अक्सर सरकारों की पहचान घोषणाओं से होती रही है, लेकिन भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार धीरे-धीरे काम के आधार पर अपनी पहचान गढ़ती दिखाई दे रही है। सत्ता संभालने के बाद से ही सरकार ने यह संकेत दे दिया था कि उसका फोकस केवल योजनाएँ घोषित करने पर नहीं, बल्कि योजनाओं को आम आदमी तक पहुँचाने पर रहेगा।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा स्थापित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), अंत्योदय और लास्ट माइल डिलीवरी जैसे सिद्धांतों को भजनलाल सरकार ने राजस्थान के संदर्भ में लागू करने की कोशिश की है। नतीजा यह है कि आज राज्य में किसान, महिला, श्रमिक, छात्र और बुज़ुर्ग,हर वर्ग सरकार की योजनाओं से सीधे जुड़ता नज़र आ रहा है।
सरकार की सोच में बदलाव: घोषणा से क्रियान्वयन की ओर
राजस्थान में लंबे समय तक यह शिकायत रही कि योजनाएँ बनती हैं, लेकिन उनका लाभ ज़मीन तक पहुँचते-पहुँचते प्रक्रिया में उलझ जाता है। भजनलाल सरकार ने इसी व्यवस्था को बदलने को प्राथमिकता दी।सरकार का स्पष्ट मानना है कि सुशासन का मतलब नई योजना लाना नहीं, बल्कि मौजूदा योजनाओं को सही व्यक्ति तक पहुँचाना है। यही वजह है कि बीते दो वर्षों में प्रशासनिक ढांचे को सरल करने, विभागों को एक मंच पर लाने और डिजिटल माध्यम से लाभ देने पर ज़ोर दिया गया।
DBT मॉडल: पैसा सीधे खाते में, भरोसा सीधे सरकार पर
भजनलाल सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक है ₹1,590 करोड़ से अधिक की राशि का सीधे लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर। यह राशि किसान, महिला, निर्माण श्रमिक, सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारी और अन्य पात्र वर्गों तक पहुँची है।इस मॉडल के तीन बड़े फायदे सामने आए हैं:
बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त
समय की बचत
सरकार और नागरिक के बीच भरोसे में वृद्धि
राजस्थान जैसे राज्य में कृषि केवल आजीविका नहीं, बल्कि सामाजिक संरचना का आधार है। इसे ध्यान में रखते हुए भजनलाल सरकार ने किसानों को राहत देने वाली योजनाओं को तेज़ी से लागू किया।
किसान सम्मान निधि की किस्तें
एमएसपी की जानकारी और जागरूकता
किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) को बढ़ावा
सॉयल हेल्थ कार्ड का वितरण
इन प्रयासों का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि किसानों को जानकारी-आधारित खेती की ओर ले जाना है। सरकार का मानना है कि यदि किसान को सही समय पर सही जानकारी मिले, तो वह बाजार की अस्थिरता से खुद को बचा सकता है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़: पशुपालन और डेयरी
राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में पशुपालन किसानों की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। भजनलाल सरकार ने इस क्षेत्र को भी प्राथमिकता दी है।
पशुओं का बीमा पंजीकरण
समय पर टीकाकरण अभियान
मोबाइल वेटनरी सेवाएँ
डेयरी सहकारी समितियों को प्रोत्साहन
इन पहलों का सीधा असर ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा पर पड़ा है। जब पशुधन सुरक्षित होता है, तो गांव की अर्थव्यवस्था भी स्थिर रहती है।
महिलाओं के लिए योजनाएँ: लाभार्थी से भागीदार तक
भजनलाल सरकार की नीतियों में महिलाओं को केवल सहायता पाने वाली इकाई नहीं, बल्कि विकास की भागीदार के रूप में देखा गया है।
स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता
डेयरी और ग्रामीण उद्यमों से जोड़ना
छात्राओं के लिए देवनारायण स्कूटी योजना का विस्तार
सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना
सरकार का दावा है कि इन प्रयासों से महिलाएँ अब निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
युवा और रोजगार: केवल सरकारी नौकरी नहीं, स्वरोजगार पर ज़ोर
राजस्थान में युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार की रही है। भजनलाल सरकार ने इस मुद्दे को केवल भर्ती परीक्षाओं तक सीमित नहीं रखा।
स्वरोजगार आवेदन
कस्टम हायरिंग सेंटर्स
स्टार्ट-अप और स्किल डेवलपमेंट को बढ़ावा
कृषि-आधारित उद्यमों को सहायता
सरपंचों का उत्साह: सीधे संवाद शासन से
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हाल ही में सरपंच संघ कार्यक्रम में कहा कि पंचायतों को मजबूत बनाकर ही शासन का असली लाभ गाँव तक पहुँच सकता है।कार्यक्रम में स्थानीय नेताओं ने सीधे जनता से जुड़ी समस्याओं पर बातचीत की।
खाद्य सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा: सबसे कमजोर वर्ग पर ध्यान
राज्य सरकार ने खाद्य सुरक्षा योजना के दायरे को बढ़ाने का त्वरित निर्णय लिया है, जिससे लाखों नए जरूरतमंद परिवारों को सस्ती दर पर अनाज मिल सके।इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा पेंशन, वृद्धावस्था सहायता और दिव्यांग लाभ जैसी योजनाओं में सुधार पर काम किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना से वंचित न रहे, यही उसकी प्राथमिकता है।
राजनीतिक नहीं, प्रशासनिक बदलाव की कहानी
भजनलाल सरकार की योजनाओं की खास बात यह है कि वे केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं दिखतीं। प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रियाओं को सरल करना, डिजिटल सिस्टम अपनाना और जवाबदेही तय करना—ये सभी संकेत देते हैं कि सरकार संरचनात्मक सुधार की दिशा में काम कर रही है।
भविष्य की योजना: भव्य लक्ष्य 2030
भजनलाल सरकार ने यह लक्ष्य रखा है कि राजस्थान को 2030 तक $350 बिलियन अर्थव्यवस्था के तौर पर स्थापित किया जाएगा।
10 लाख से अधिक रोजगार की रूपरेखा
नए औद्योगिक क्षेत्र
निवेश आकर्षण रणनीतियाँ
सतत ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों का विकास अधियारित लक्ष्य
आगे की राह: निरंतरता सबसे बड़ा सवाल
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान मुंबई विश्विद्यालय के एलुमनाई मैनेजमेंट विश्लेषक ,देश में प्रख्यात युवा पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट डॉ नयन प्रकाश गांधी का मानना है कि वस्तुतः योजनाओं की शुरुआत उत्साहजनक है, परंतु असली परीक्षा निरंतरता की रहेगी ।
क्या लाभ समय पर मिलता रहेगा?
क्या शिकायत निवारण प्रभावी रहेगा?
क्या अंतिम व्यक्ति तक पहुँच बनी रहेगी?
इन सवालों के जवाब आने वाला समय देगा। लेकिन फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भजनलाल सरकार ने शासन की दिशा को घोषणा-केंद्रित से जन-केंद्रित बनाने की कोशिश की है।राजस्थान में भजनलाल सरकार की योजनाएँ यह संकेत दे रही हैं कि जन कल्याण और लोक कल्याण के बीच की दूरी कम की जा सकती है, बशर्ते राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक ईमानदारी साथ हो।अगर यह रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में राजस्थान को सुशासन और समावेशी विकास के मॉडल राज्य के रूप में देखा जा सकता है।

रिपोर्टर
The Reporter specializes in covering a news beat, produces daily news for Aaple Rajya News
Aishwarya Sinha